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这一次,全世界打脸以色列,也狠狠打脸美国_我的网站

鲁豫有约

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5月10日,联大特别会议,同意巴勒斯坦成为联合国新会员国,143票赞成,9票反对,25票弃权。

B |     डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार (27 अगस्त, 2025) को मध्य प्रदेश के महू में रण-संवाद 2025 कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि आने वाले समय में युद्ध कैसे लड़ा जाएगा। साथ ही रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत कभी पहले आक्रमण नहीं करता लेकिन अगर चुनौती मिलती है तो उसका पूरी ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा।,राजनाथ सिंह ने कहा, "कार्यक्रम का शीर्षक, 'रण संवाद', मुझे बहुत दिलचस्प लगा। यह नाम ही चिंतन और मनन का विषय है। एक ओर 'रण' युद्ध और संघर्ष की कल्पना जगाता है तो दूसरी ओर 'संवाद' संवाद, चर्चा और सुलह की ओर इशारा करता है। पहली नजर में, ये दोनों शब्द विरोधाभासी लगते हैं। जहां युद्ध है, वहां संवाद कैसे हो सकता है और जहां संवाद हो रहा है, वहां युद्ध कैसे हो सकता है? लेकिन गहराई से देखें तो यही नाम हमारे समय की सबसे प्रासंगिक सच्चाइयों में से एक को अपने में समेटे हुए है।",रण-संवाद 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "रण-संवाद का भारत में एक ऐतिहासिक आधार भी है और यह मुझे हमारे इतिहास की कई घटनाओं की याद दिलाता है जो हमें दिखाती हैं कि कैसे सभ्यतागत युद्धों का अर्थ 'रण' और संवादों का अर्थ 'संवाद' होता है और भारत में ये दोनों आपस में गुंथे हुए थे। हमारी संस्कृति में, संवाद युद्ध से अलग नहीं है। यह युद्ध से पहले होता है। यह युद्ध के दौरान होता है और युद्ध के बाद भी जारी रहता है। उदाहरण के लिए, महाभारत को ही लें, युद्ध को रोकने के लिए, भगवान कृष्ण शांति के दूत के रूप में गए। वे संवाद करने गए ताकि युद्ध को टाला जा सके।",उन्होंने कहा, "भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे; वे प्रौद्योगिकी, खुफिया, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का संयुक्त खेल होंगे। आने वाले समय में जो राष्ट्र प्रौद्योगिकी, रणनीति और अनुकूलनशीलता के त्रिकोण में निपुण होगा, वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा। सरल शब्दों में कहें तो यह इतिहास से सीखने और एक नया इतिहास लिखने का समय है; यह भविष्य का अनुमान लगाने और उसे आकार देने का समय है।",राजनाथ सिंह ने कहा, "आज, 21वीं सदी में, यह परिवर्तन और भी तेज हो गया है। सिर्फ सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आकार अब पर्याप्त नहीं है। साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित हवाई वाहन और उपग्रह-आधारित निगरानी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं। सटीक निर्देशित हथियार, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित जानकारी अब किसी भी संघर्ष में सफलता की आधारशिला बन गए हैं। आधुनिक युद्ध अब जमीन, समुद्र और हवा तक ही सीमित नहीं हैं; वे अब अंतरिक्ष और साइबरस्पेस तक फैल गए हैं। उपग्रह प्रणालियां, उपग्रह-रोधी हथियार और अंतरिक्ष कमान केंद्र शक्ति के नए साधन हैं। इसलिए, आज हमें केवल रक्षात्मक तैयारी की ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीति की भी आवश्यकता है।",रण-संवाद 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत कभी भी युद्ध चाहने वाला राष्ट्र नहीं रहा है। हमने कभी किसी के विरुद्ध आक्रमण नहीं किया है। वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकता बिल्कुल अलग है। हालांकि हमारी कोई आक्रामक मंशा नहीं है, फिर भी अगर कोई हमें चुनौती देता है तो यह जरूरी हो जाता है कि हम पूरी ताकत से उसका जवाब दें। ऐसा करने के लिए, हमें अपनी रक्षा तैयारियों को निरंतर बढ़ाना होगा। यही कारण है कि प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नति और साझेदारों के साथ निरंतर संवाद हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।",(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)  यह भी पढ़ें- 'हमारे पास तैरने वाला F-35...',INS उदयगिरी और हिमगिरी की कमीशनिंग पर राजनाथ सिंह की दहाड़。

C |

中国肯定投了赞成票,和中国站在一起的,还有142个国家,这种压倒性多数,就是国际社会愤怒和不满的强烈表达。
考虑到加沙战火的大背景,这其实是全世界在打脸以色列,也狠狠打脸美国。
9票中,1票是以色列,1票是美国。还有几票,来自唯美国是从的太平洋小岛国。
当然,斥责这些国家,也没有多大意义,因为我也清楚,他们很多时候,也是身不由己,他们肯定遭到了美国的强大压力。
本来阿根廷也一直支持巴勒斯坦,但米莱上台后,阿根廷外交政策180度转变,米莱都亲自皈依犹太教,亲自到哭墙下痛哭流涕,自然阿根廷站以色列一边了。

D |

1,欧洲国家,除了捷克、匈牙利外,绝大多数都是弃权,弃权也是一种态度,在美国的高压下,弃权事实上已经表明了对以色列的不满,对巴勒斯坦人的同情。
2,弃权票中,我们看到了英国、意大利、加拿大,也看到了德国,德国因为历史原罪,对以色列几乎都是大气不敢出的国家,这次都勇敢地投了弃权票。
3,看了一下,弃权的还有乌克兰。乌克兰总统泽连斯基是犹太人,因为俄乌冲突,乌克兰是美国铁杆,自然站以色列一边。但在这个大是大非的问题上,乌克兰难得地清醒,投了弃权票。
4,还有一个重要的欧洲国家,既没投反对票,也没投弃权票,而是直接投了赞成票。那就是法国,法国就是不一般!
5,事实上,和法国一起投赞成票的,还有多个欧洲国家,爱尔兰、挪威、比利时、冰岛,我看到挪威代表还特意留下了表决的照片,她为这一刻感到自豪。

E |

第一个场景,投票通过后,全场热烈掌声,巴勒斯坦常驻联合国观察员利亚德·曼苏尔,激动地高举双手,向大家表达感谢。
他说:“投赞成票是正确的做法,在未来的岁月里,你们的国家,将会为在这最黑暗的时刻捍卫自由、正义和和平而感到自豪。”
第二个场景,愤怒的以色列驻联合国大使吉拉德·埃丹,当场将《联合国宪章》投进小碎纸箱。
他宣称:是你们正在威胁《联合国宪章》,用你们的双手,为你们感到羞耻!
因为美国的阻挠,巴勒斯坦现在只是联合国观察员国。根据《联合国宪章》,联合国要接纳新会员国,需经安理会推荐,再由联大作出决定。
所以才有了这次联大特别会议,才有了这样的压倒性多数,事实上,这个表决结果,就是全世界在对以色列说不,对美国说不。
这其中,很多还是美国的盟友,包括但不限于法国、比利时、日本、韩国、澳大利亚、新西兰……
由此,巴勒斯坦“入联”问题,又被“打回”安理会重审。
但我们也可以预料,全世界都支持的事情,但美国十之八九,又会是一票否决。

F |

这就是现在的世界,全世界打脸美国和以色列,但以色列有美国撑腰,美国我行我素,国际社会无可奈何,安理会无所作为,巴勒斯坦欲哭无泪……

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Published on:01:46:56